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फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) भारतीय निवेशकों की पसंदीदा बचत योजनाओं में से एक है, जो सुरक्षित रिटर्न और स्थिर ब्याज दर प्रदान करती है। लेकिन मार्च 2025 से बैंक FD से जुड़े कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं, जो निवेशकों को प्रभावित कर सकते हैं।

अगर आप बैंक FD कराने की योजना बना रहे हैं, तो आपको इन 4 नए नियमों को जानना जरूरी है। इससे आप अपने निवेश को बेहतर तरीके से प्लान कर सकते हैं और ज्यादा फायदा उठा सकते हैं।


1. ब्याज दरों में बदलाव (Interest Rate Changes)

मार्च 2025 से बैंकों की FD पर ब्याज दरों में बदलाव किया गया है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नए दिशानिर्देशों के अनुसार, छोटी अवधि और लंबी अवधि की FD पर अलग-अलग ब्याज दरें लागू की गई हैं।

नई ब्याज दरें (संभावित)

अवधिपुरानी ब्याज दरनई ब्याज दर (मार्च 2025 से)
7 दिन – 6 माह3.50% – 5.50%4.00% – 5.75%
6 माह – 1 साल5.75% – 6.50%6.00% – 6.75%
1 साल – 5 साल6.50% – 7.25%6.75% – 7.50%
5 साल से ज्यादा7.00% – 7.50%7.25% – 8.00%

सीनियर सिटीजन्स (60+ उम्र) के लिए 0.50% से 0.75% तक अतिरिक्त ब्याज मिलेगा।
बैंक-टू-बैंक ब्याज दरों में अंतर हो सकता है, इसलिए निवेश से पहले तुलना जरूर करें।


2. FD पर टैक्स में बदलाव (Taxation Rules Update)

मार्च 2025 से FD पर टैक्स नियमों में बड़ा बदलाव किया गया है। अब FD पर अर्जित ब्याज पर कराधान को नई स्लैब दरों के अनुसार तय किया गया है।

मुख्य बदलाव:

📌 TDS (Tax Deducted at Source) की सीमा बढ़ी – पहले ₹40,000 (सीनियर सिटीजन्स के लिए ₹50,000) तक के ब्याज पर कोई TDS नहीं लगता था, अब यह सीमा ₹50,000 (सीनियर सिटीजन्स के लिए ₹60,000) कर दी गई है।
📌 FD पर ब्याज को निवेशक की कुल आय में जोड़ा जाएगा और नई टैक्स दरों के अनुसार कर लगेगा।
📌 अगर आपकी कुल आय टैक्स स्लैब से कम है, तो आप फॉर्म 15G/15H भरकर TDS से बच सकते हैं।

टैक्स स्लैब के अनुसार ब्याज पर कर:

कुल वार्षिक आयFD पर टैक्स (%)
₹2.5 लाख तककोई टैक्स नहीं
₹2.5 लाख – ₹5 लाख5%
₹5 लाख – ₹10 लाख20%
₹10 लाख से ज्यादा30%

3. ऑटो-रिन्युअल नियमों में बदलाव (Auto-Renewal Policy Changes)

अब तक, FD की परिपक्वता (Maturity) के बाद अगर निवेशक कोई निर्णय नहीं लेता था, तो बैंक अपने आप FD को ऑटो-रिन्यू कर देता था। लेकिन मार्च 2025 से यह नियम बदल गया है।

नए नियम:

✔️ अब FD की परिपक्वता के बाद ऑटो-रिन्युअल नहीं होगा।
✔️ परिपक्व राशि सीधे निवेशक के बैंक खाते में ट्रांसफर कर दी जाएगी।
✔️ अगर निवेशक FD जारी रखना चाहता है, तो उसे बैंक में जाकर नया निवेश करना होगा।
✔️ ऑटो-रिन्युअल की सुविधा केवल उन्हीं निवेशकों को मिलेगी जो इसके लिए पहले से अनुरोध करेंगे।

📢 क्या करें? अगर आप अपनी FD को रिन्यू करवाना चाहते हैं, तो समय पर बैंक को सूचित करें या नेट बैंकिंग से इसे एक्सटेंड करें।


4. लिक्विडिटी और प्री-मैच्योर FD नियमों में बदलाव (Premature Withdrawal Rules)

अब निवेशकों को प्री-मैच्योर FD तोड़ने पर नए नियमों का पालन करना होगा। पहले निवेशक बिना ज्यादा पेनल्टी के FD को समय से पहले तोड़ सकते थे, लेकिन अब कुछ बदलाव किए गए हैं।

नए नियम:

✔️ FD समय से पहले तोड़ने पर अधिक पेनल्टी लगेगी।
✔️ प्री-मैच्योर FD तोड़ने पर 0.50% – 1.00% तक ब्याज दर में कटौती की जाएगी।
✔️ कुछ बैंकों ने FD लॉक-इन पीरियड (3-6 महीने) लागू किया है, जिसमें पहले 3-6 महीने तक FD तोड़ी नहीं जा सकेगी।
✔️ इमरजेंसी मामलों (मेडिकल, शिक्षा, मृत्यु) में छूट दी जा सकती है।

📢 क्या करें? अगर आपको पैसे की जरूरत हो सकती है, तो “लिक्विड FD” या “फ्लेक्सी FD” विकल्प चुनें, जिससे आपको जरूरत पड़ने पर पैसे निकालने में आसानी होगी।


FD कराने से पहले ये बातें ध्यान रखें (Important Tips Before Investing in FD)

ब्याज दरों की तुलना करें: अलग-अलग बैंकों की ब्याज दरों की तुलना करने के बाद ही FD कराएं।
छोटी अवधि की FD चुनें: ब्याज दरों में बदलाव को देखते हुए छोटी अवधि की FD अधिक लाभदायक हो सकती है।
टैक्स बचाने के लिए 5 साल की FD करें: 5 साल की टैक्स सेविंग FD से धारा 80C के तहत टैक्स छूट मिलती है।
बैंक की ऑटो-रिन्युअल पॉलिसी चेक करें: अगर आप FD को जारी रखना चाहते हैं तो पहले से बैंक को सूचित करें।
इमरजेंसी के लिए लिक्विड FD चुनें: इससे जरूरत पड़ने पर पेनल्टी के बिना पैसे निकाल सकते हैं।


निष्कर्ष (Conclusion)

मार्च 2025 से बैंक FD के नियमों में बड़े बदलाव हुए हैं। यदि आप FD में निवेश करना चाहते हैं, तो नई ब्याज दरें, टैक्स नियम, ऑटो-रिन्युअल और प्री-मैच्योर FD नियमों को ध्यान में रखकर निवेश करें।

📢 क्या आपने नई FD नियमों के बारे में पहले सुना था? हमें कमेंट में बताएं! 💬

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